विराटपुर : माँ चंडिका स्थान में आखिर कैसे हुई चोरी ? आइये जानें
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| माँ चंडिका की पहले और अब की तस्वीर |
माँ चंडिका के प्रति लोगों में इतनी श्रद्धा है की उनकी दर्शन करने लोग हज़ारों किलोमीटर दूरी तय कर चंडी स्थान विराटपुर आते है लेकिन बीते दिनों ने मंदिर से अष्टधातु की मृर्ति चोरी हो गई ,ग्रामीणों की मानें तो एक माह पूर्व दानपेटी से रूपए की हुई चोरी की घटना के बाद पुलिस अगर सजग रहती तो शायद चोर मूर्ति चोरी की घटना को अंजाम नहीं देते। कहा कि चोरों का चेहरा पहले भी सीसीटीवी में कैद हो चुका है। परंतु ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। वहीं लोग कार्रवाई की मांग को लेकर उग्र आंदोलन करने की बात कह रहे हैं।
वहीं गणपति ठाकुर, डीएसपी , सहरसा का कहना है की -"विराटपुर स्थित चंडिका स्थान में हुई चोरी की घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर उछ्वेदन को टीम गठित कर दी गई है। जल्द ही चोरों की गिरफ्तारी व उछ्वेदन की जाएगी।"
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| चोरी होने के बाद सड़कों को आसपास के छेत्रों के लोगों द्वारा जाम किया गया |
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| CCTV में कैद तस्वीर |
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| आसपास के छेत्रों में पूछताछ करते हुए पुलिस अधिकारी |
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| जाँच में जुटे अधिकारी |
आइये जानते है चंडिका स्थान के बारे में
चंडिका स्थान: पांडवों ने की थी मां की पूजा
राजा विराट की धरती विराटपुर गांव में अवस्थित मां चंडिका स्थान इस इलाके का धरोहर है। यहां महाभारत काल अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी मां की पूजा-अर्चना की थी। यहां पुरातत्व विभाग को खुदाई में हजारों वर्ष पुराना अवशेष मिल चुका है। कहा जाता है कि मंदिर हजारों वर्ष पुराना है और मां चंडी यहां स्वयं अंकुरित हुई थी।
अज्ञातवास के दौरान पहुंचे थे पांडव
मान्यता है कि महाभारत काल के दौरान जब पांडवों को अज्ञातवास करना पड़ा था, उस समय पांडव यहां आए थे। उस दौरान पांडवों ने मां चंडी की पूजा-अर्चना की थी। काफी दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद मां ने प्रसन्न होकर पांडवों को विजयश्री का आर्शीवाद दिया था और पांडवों ने महाभारत युद्ध में विजयश्री भी हासिल की थी।
विलीन हो जाता है जल
मां की पूजा-अर्चना के दौरान चढ़ाया जाने वाला जल कहां जाता है इसकी जानकारी आज तक नहीं मिल पायी है। विराटपुर गांव निवासी पूर्व पर्यटन मंत्री अशोक कुमार सिंह कहते हैं कि कई बार इसकी जानकारी लेने के लिए विशेषज्ञ अभियंताओं के दल को मंगाया गया, परंतु इसकी पता नहीं चल पाया।
पुरातत्व विभाग को मिला था अवशेष
मां चंडी स्थान को पर्यटन स्थल बनाने के दिशा में पूर्व पर्यटन मंत्री अशोक कुमार सिंह के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है। उनके प्रयास से कई बार पुरातत्व विभाग व पर्यटन विभाग की टीम यहां आ चुकी है। पुरातत्व विभाग द्वारा दो बार सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण में हजारों वर्ष पुराने अवशेष भी मिले है। खुदाई से यह प्रमाण मिला है कि मंदिर हजारों वर्ष पुराना है और लोगों के प्रमुख आस्था का केन्द्र है।
दुर्गापूजा में लगती है भीड़
जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूरी पर अतलखा रोड में तीन किलोमीटर की दूरी पर मंदिर अवस्थित है। दुर्गा पूजा में प्रतिदिन बलि दी जाती है। वहीं प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।





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